शैक्षिक दर्शन | Educational philosophy | shiksha darshan | psychology notes

शैक्षिक दर्शन


शैक्षिक दर्शन | Educational philosophy | shiksha darshan
शैक्षिक दर्शन | Educational philosophy | shiksha darshan

दर्शन

ज्ञान के विज्ञान को दर्शन कहा जाता है। दर्शन विभिन्न विचारों की सामूहिक रचना को कहते हैं। दर्शन के अंतर्गत गहरा ज्ञान समाहित होता है। दर्शन सत्य की खोज में एक आयोजित प्रयत्न है। 

शैक्षिक दर्शन

दर्शन-शास्त्र की वह बातें जो शिक्षा लेने और देने के लिए उपयोगी हैं उन्हें शैक्षिक दर्शन कहते हैं। 

शैक्षिक दर्शन के चार वाद
  1. आदर्शवाद 
  2. प्रकृतिवाद 
  3. प्रयोजनवाद 
  4. यथार्थवाद 

आदर्शवाद ( IDEALISM )

  आदर्शवाद का पिता प्लेटो को माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि आदर्शवाद  के सिद्धांतों का विकास प्लेटो के विचारों के से उत्पन्न हुआ है  जैसे Theory of IDEOLOGY भी कहा जाता है। आदर्शवाद को सकारात्मक शिक्षा भी कहा जाता है। इसका जन्म भारत और यूनान( ग्रीक) में हुआ था।  
  • आदर्शवाद में माना जाता है कि : UNIVERSE ब्रह्मांड की रचना परमात्मा ने की है। 
  • यह आध्यात्मिक होते हैं आत्मा और उसकी बातों को मानते हैं।
  • Our soul is form of God, worship of God, only God is truth 
  • यह मूल्यों को मानते हैं। जैसे नैतिक मूल्य, चारित्रिक मूल्य, आदर्श मूल्य आदि। 
  • इसका आधार आत्मा है। इनके अनुसार आत्मा मन और विचारों को महत्व दिया जाता है। Give importance to the soul, mind and thoughts.
  • आदर्शवाद में शिक्षक केंद्रित शिक्षा होती है। इनके अनुसार आध्यात्मिक अध्यापक ही एक प्राकृतिक बच्चे को आध्यात्मिक व्यक्ति बना सकता है। इसमें शिक्षक को सर्वोपरि माना गया है। आदर्शवाद में सबसे आदर्श व्यक्ति शिक्षक  को माना गया है।
  • सबसे पहले भगवान सर्वोच्च फिर मनुष्य सर्वोच्च है। “ सत्यम  शिवम सुंदरम “ God is supreme then man is supreme.
  • आदर्शवाद में शिक्षा का उद्देश्य व्यक्तित्व का विकास करना है।

आदर्शवाद की कुछ शिक्षण विधियां ( पारंपरिक विधि ) : Lecture method, question answer method, demonstration method, story telling method,  book reading ( साहित्य पठन ), discussion, drama method. 
अनुशासन :
  • आदर्शवाद में अनुशासन  कड़ा होता था लेकिन बच्चों को punishment नहीं देते थे।
  • विद्यार्थियों को  रटने पर बल देते  हैं।
  • इनका मानना था कि  मनुष्य को सादा जीवन उच्च विचार  के साथ ही अपना जीवन व्यतीत करना चाहिए।
  • आदर्शवाद में मनुष्य को अपनी भौतिक आवश्यकताओं को त्यागने  की बात कही गई है।
  • इसी बात के कारण इनकी आलोचना होती है।

शिक्षा के लक्ष्य
  • आत्मबोध की प्राप्ति ( Self realisation ) 
  • यह जानना कि हमारी आत्मा और परमात्मा में क्या संबंध है।

कुछ आदर्शवादियों के नाम :  Aristotle सुकरात,  Plato प्लेटो,  frobel फ्रोबेल, Gandhiji गांधी जी,  Kant कांत, डिस्कार्टे,  अरविंद घोष,  Vivekanand विवेकानंद, टैगोर, Radha Krishna राधाकृष्ण, Comaneous, fichte, आदि।


प्रकृतिवाद ( NATURALISM ) 

प्रकृतिवाद का जन्म  आदर्शवाद के विरोध में हुआ था। यह आदर्शवाद के हर बात  को नकारते हैं इसलिए इनकी शिक्षा को नकारात्मक शिक्षा भी कहा जाता है।  यह परमात्मा, आत्मा, मन, विचार, मूल्यों को महत्व नहीं देते हैं। 
  • इसमें प्रकृति ही बालक की उत्तम शिक्षक है। अध्यापक का स्थान पर्दे के पीछे है।
  • इनकी शिक्षा बाल केंद्रित है।  शिक्षा में मनोविज्ञान के प्रयोग का श्रेय इन्हें ही जाता है।
  • इनके अनुसार अध्यापक का सबसे पहला कर्तव्य बालक को  समझना है। प्रकृतिवाद में माना जाता है कि हर बालक अलग है। अध्यापक को बालक के विकास में रुकावट नहीं बनना चाहिए। बालक को प्रकृति की गोद में अकेला छोड़ देना चाहिए। 
  • बालक जन्म से ही स्वतंत्र पैदा होता है लेकिन समाज उसे बेड़ियों में जकड़ लेता है। 
  • आलोचना का कारण :  एक अबोध बालक को अकेले कैसे स्वतंत्र छोड़ा जा सकता है। 
  • इसमें बालक के स्वभाविक या जन्मजात शक्तियों का विकास चाहते हैं। 

प्रकृतिवाद में अनुशासन  : - स्वयं अनुशासन ।  प्रकृतिवाद में बालक को अपना अनुशासन खुद बनाए रखना होता है।

शिक्षा विधि
  • प्रकृतिवाद की शिक्षा बाल केंद्रित होती है।
  • प्रकृतिवाद के शिक्षण विधियों के कुछ उदाहरण : Play Way method खेल विधि, करके सीखने की विधि, inductive deductive method आगमन-निगमन विधि …

  • स्व:स्फुर्तीआत्म क्रिया द्वारा शिक्षा ( Spontaneous self activity )
  • यह भौतिक जगत और पदार्थ को मानते हैं।
  • हमारी ज्ञानेंद्रियां ज्ञान के द्वार हैं।
  • five senses →  five gates of learning 
  • शिक्षा वह अच्छी है जो मनुष्य को संघर्षशील बनाती है।
प्रकृतिवाद में अपना योगदान देने वाले कुछ शिक्षा शास्त्रियों के नाम :  Aristotle अरस्तु,  Rabindranath Tagore रविंद्र नाथ टैगोर,  Gandhiji गांधीजी, waltair वॉल्टियर,  Rousseau रूसो,   comte कॉमटे, Humes होम्स,  Bacon बेकन,  Spencer स्पेंसर, Bernard Shaw बर्नार्ड शॉ,  Darwin डार्विन,   lamarck लैमार्क,  huxley हक्सले,  Butler बटलर,  Arvind Ghosh अरविंद घोष,  Thales थेल्स, आदि।


 प्रयोजनवाद ( PRAGMATISM )

यह सबसे नया वाद है। इसका जन्म U.S.A यूएसए में हुआ।  इसके जन्मदाता Charles Pierc और सहायक विलियम जेम्स William James थे। इसे चरम सीमा Climax पर ले जाने वाले जॉन डीवी John Dewey, विलियम किलपैट्रिक William Killpatric , डॉक्टर सिलचर Dr. Siltcher जो लंदन से थे। 

प्रयोजनवाद को अन्य नाम से भी जाना जाता है जो इस प्रकार है :  परिणामवाद, फलवाद, व्यवहारिकतावाद, उपयोगितावाद, परिवर्तनवाद, अनुभववाद, अर्थवाद, क्रियावाद, आदि।

प्रयोजनवादी दो बातों को महत्व देते हैं-
  1. समाज 
  2. उपयोगिता

  • शिक्षा वह उत्तम है या सच्ची शिक्षा वह है जो आधुनिक समाज के लिए उपयोगिता दे या उपयोगी हो।
  • प्रयोजनवाद के अंतर्गत भूत काल और भविष्य काल में विश्वास नहीं करते हैं।
  • यह मूल्यों और परमात्मा को मानते हैं यदि समाज को लाभ होता हो तो।
  • इनके अनुसार मूल्यों का निर्माण क्रिया के अंतर्गत होता है। कोई भी मूल्य यह सत्य अंतिम नहीं है। Not  final and permanent.
  • प्रयोजनवाद के अंतर्गत सामाजिक अनुशासन को बल दिया जाता है। जो सामूहिक परियोजना करने में  प्रयोग आता है।
  • कोई भी संस्था इतनी पुनीत नहीं है कि स्कूल पर सुधार ना कर सके।

प्रयोजनवाद की कुछ शिक्षण विधियां
  • PROJECT METHOD जो दैनिक जीवन से जुड़े हो SOCIAL PROJECT.
  • समस्या समाधान कर्ता Problem solver

यथार्थवाद ( REALISM )

अरस्तु को यथार्थवाद का पिता भी माना जाता है। यथार्थवाद में वस्तु  के वास्तविक रूप को ही असली माना जाता है। यथार्थवादी भी परमात्मा को नहीं मानते हैं। इनका मानना है कि ब्रह्मांड को मनुष्य द्वारा ही बनाया गया है। यह Researcher खोजकर्ता, Scientist  वैज्ञानिक, Mathematician गणितज्ञ, Technologist प्रौद्योगिकीविद, आदि होते हैं। यह मानव कल्याण के लिए प्रयोग खोज Research करते हैं। 

यथार्थवाद के कुछ शिक्षा शास्त्री के नाम :  अरस्तु, रेबलियास, बेकन, मिल्टन, वाइटहेड, लोके, रातके, कोमेनीयस, आदि यथार्थवादी यथार्थवाद के समर्थक हैं। 


Post a Comment

[blogger]

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget