Memory | स्मृति का अर्थ, प्रकार, अवस्थाएं

स्मृति | Memory

स्मृति

        जो कुछ भी व्यक्ति सुनता है, समझता है, उसका चिन्ह मस्तिष्क में बनता है मस्तिष्क में चिन्ह बनना ही स्मृति कहलाता है।

Memory | स्मृति का अर्थ, प्रकार, अवस्थाएं
Memory | स्मृति का अर्थ, प्रकार, अवस्थाएं


स्मृति की अवस्थाएं

  संकेतन  🠆 संचयन  🠆 पुनः प्राप्ति

  Encoding 🠆  storage 🠆 retrieval


स्मृति के प्रकार

1. संवेदी स्मृति Sensory Memory
            संवेदी स्मृति की अवस्था 1 सेकेंड से कम समय तक चलती है।

2. अल्पकालिक स्मृति  Short Term Memory
            अल्पकालिक स्मृति की अवस्था 30 सेकंड तक चलती है।

3. दीर्घकालिक स्मृति  Long Term Memory
            दीर्घकालिक स्मृति की अवस्था 30 सेकंड से अधिक समय तक चलती है।


दीर्घकालिक स्मृति के प्रकार

1. घोषणात्मक स्मृति Declarative Memory
            घोषणात्मक स्मृति में ज्ञान सूचना एवं घटना से संबंधित स्मृति आती है।

2. प्रक्रिया मूलक स्मृति Procedural Memory
            किसी भी कार्य को करने की विधि से संबंधित स्मृति प्रक्रिया मूलक स्मृति कहलाती है। जैसे तैराकी कैसे करी जाती है। गाड़ी कैसे चलाई जाती है। आदि... 


घोषणात्मक स्मृति के प्रकार

1. आर्थी  स्मृति Semantic Memory
            ज्ञान और सूचना से संबंधित स्मृति को आर्थी स्मृति कहते हैं। 

2. घटनापरक स्मृति Episodic Memory
            व्यक्तिगत जीवन की घटना से संबंधित जो स्मृति होती है उसे घटनापरक स्मृति कहते हैं ।


दीर्घकालिक स्मृति के अन्य प्रकार

1. मिथ्या स्मृति False Memory
            कुछ घटनाएं हमारे जीवन में घटित नहीं होती फिर भी उनके घटित होने का आभास हमें होता है।

2. क्षणदीप  स्मृति Flash bulb Memory
            हमारे जीवन में कुछ घटनाएं बहुत सुखद होती हैं उनका जिक्र होते ही वह हमें बहुत अच्छे ढंग से स्मरण हो जाती हैं।

3. प्रत्यक्ष साक्षी स्मृति Witnessed Memory
            न्यायालय का निर्णय गवाहों पर निर्भर करता है किंतु गवाह 100% सही कह रहा है यह आवश्यक नहीं क्योंकि गवाह वही कहते हैं जो उसे दिखाया या सुनाया गया।

4. अंतर्निहित स्मृति Implicit Memory
            कुछ स्मृति करते समय बहुत स्पष्ट होती हैं लेकिन बताते समय उतनी स्पष्ट नहीं होती।


स्मृति के पक्ष

  • सकारात्मक पक्ष - स्मरण
  • नकारात्मक पक्ष - विस्मरण

सकारात्मक पक्ष - स्मरण

        स्मृति की अवस्थाएं सही ढंग से पूर्ण होती हैं।

स्मरण का स्वरूप

  • स्मरण का स्वरूप रचनात्मक होता है अर्थात स्मरण करते हुए व्यक्ति सीखे हुए प्रकरण में कुछ जोड़ते हैं या घटाते हैं।  स्मरण का यही स्वरूप अधिक देखने को मिलता है।
  • स्मरण का स्वरूप  पुनर उत्पादक होता है। अर्थात स्मरण करते समय व्यक्ति सीखे हुए विषय को हूबहू करता है। बिल्कुल कार्बन कॉपी की तरह। स्मरण का यह स्वरूप कम देखने को मिलता है।

नकारात्मक पक्ष - विस्मरण

        नकारात्मक पक्ष अर्थात स्मृति की अवस्थाएं सही ढंग से पूर्ण नहीं होती।

विस्मरण के कारण

1. समय का बीतना - क्षय का सिद्धांत Decay Theory
         समय के साथ हर चीज का विनाश होता है इसी तरह समय बीतने के साथ-साथ विषय को भूल जाते हैं। प्रारंभ में भूलने की गति तेज होती है और बाद में  धीरे-धीरे भूलने की गति कम हो जाती है। आता है व्यक्ति को अभ्यास करते रहना चाहिए।

2. हम भूलना चाहते हैं - अभिप्रेरणात्मक सिद्धांत Motivational Theory Sigmund Freud
        हम भूलते हैं क्योंकि हम भूलना चाहते हैं।

3. विषयों की समानता बाधक सिद्धांत Interfere Theory  व्यवहारवादियों द्वारा
        विषयों की समानता विस्मरण का कारण होती है। जिस भी विषय को व्यक्ति स्मरण करना चाहता है उसके पहले और उसके बाद में सीखें ज्ञान समान होने के कारण बाधा डालता है। अतः विस्मरण को रोकने के लिए व्यक्ति को  विषय में अंतर करके सीखना चाहिए।


स्मृति को उन्नत बनाने की विधियां

1. ध्यान केंद्रित करके सीखना
2. अपनी स्मरण शक्ति पर विश्वास करते हुए सीखना
                
सीखना

  • न्यून सीखना Under Learning
  • युक्त सीखना Just Learning
  • आधिक्य सीखना Over Learning  (BEST)

3. समझ कर सीखना
4. लंबे विषय के रूप में सीखना

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